शुक्रवार, 11 अक्तूबर 2013

देश सुन रहा है...

गीत/ हरि नारायण तिवारी



देश सुन रहा है
जो वह सुना रहे हैं,
वही देश सुन रहा है।
जो जो दिखा रहे हैं,
वही देश गुन रहा है।।1।।

हम लोग बहु पठित हैं,
कुछ वर्ग संगठित हैं।
लेकिन अपढ़ अभी भी,
मौजूद परिगणित हैं।
रमुआ का पढ़ा बेटा,
क्या चीज बुन रहा है।।1।।

सड़कों का शोर घर-घर,
आवाज दे रहा है।
भाषण की गूढ़ता का,
अनुवाद कर रहा है।
वोटर समेटने की,
दीवान चुन रहा है।।2।।

भूखा कहाँ पड़ा है,
सूखा कहाँ पड़ा है।
बेघर के पास जाकर,
लालच लिये खड़ा है।
तिकड़म की अंगणित में,
हरि भी निपुण रहा।।3।।

हरि नारायण तिवारी

बी-112, विश्व बैंक कालोनी,
बर्रा, कानपुर-27
मो. 9936770560
फोन 0512-2680865

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