गुरुवार, 26 जून 2014

ज्योतिर्मई पन्त के चार हाइकु


(एक)


सूर्य व्यापारी
धरा से लेता वाष्प
लौटाता वर्षा .

 (दो)


ग्रीष्म का ताप
पिघलता है सोना
अमलतास .

(तीन)


मुँडेर कागा
अतिथि आगमन
गृहिणी चिंता .

(चार)


मेघ उमड़े
देख धरा की पीर
नीर छलके .
..

1 टिप्पणी:

  1. aap ki subodhsrijan me behtreen rachnayein dekhne ko milein .. bhut hi shreshth lekhan hai aapka - bhut bhut badhai swekarein ...

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