रविवार, 31 अगस्त 2014

दो गीत-कृष्ण नन्दन मौर्य


चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार



हमको प्यारी है..

       
इकतारा के स्वर–संग
धुन–निर्गुण गाते दरवेश की।
हमको प्यारी है
सोंधी सी माटी अपने देश की।


गंगा–जमुना के संगम सी
मेल–मिलापों की
यह धरती है
उत्सव, उल्लासों, अपनापों की
पढ़कर देखो
यह है पावन पाती नेह–संदेश की।


रधिया की सौरी में
सोहर गाती है कुलसुम
रामजोहारी का उत्तर है
अस्सलाम अलैकुम
हमें अजेय बनाती एका
जुदा–जुदा परिवेश की।

सरहद के भी पार
शांति का दिया जलाते हैं
धोखा करते नहीं
भले हम धोखे खाते हैं
लुट जायें
पर रख लेते हैं लाज साधु के भेष की।


रहो वही माँ जैसी, माँ..


पाला था जिसको फूलों सा
उसको काँटे क्यों बोती हो।
पुन:–पुन: प्रिय राम के लिये
तुम कैकेयी क्यों होती हो।

हिरन हुआ मन का भोलापन
घुली हुई है तल्खी स्वर में
मन की साधें आज हो रहीं मुखर
मन्थरा के आखर में
हँसी–खुशी के हर अवसर पर
कोप–भवन में क्यों रोती हो।


नजर उसी की खुशियों पर है
जिसके माथे धरी दिठौनी
अधिकारों की चाह बढ़ी
अब दीख रही है ममता बौनी
फलता गेह देख बच्चों का
जली–भुनी सी क्यों होती हो।

देहरी, दरवाजों, छज्जों पर चहक रही
चिड़िया जैसी हैं
सोच बदलकर देख सको
तो बहुयें भी बिटिया जैसी हैं
भेदभाव की चकिया पर
रोटियाँ कलह की क्यों पोती हो।

क्षमा, दया का खेत लहकता
बदला कटुता के बंजर में
सूख गया अपनेपन का घट
एक बहू आने से घर में
रहो वही माँ जैसी, माँ
यह सासू का पद क्यों ढोती हो।




कृष्ण नन्दन मौर्य


  • माता – श्रीमती रामकन्या मौर्य।
  • पिता – श्री सालिक राम मौर्य।
  • जन्मतिथि- १ सितंबर १९७८ को मेरठ, उत्तर प्रदेश, भारत में।
  • शिक्षा- डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से स्नातक (हिन्दी एवं अंग्रेजी विषयों से)
  • कार्यक्षेत्र- भारत संचार निगम लि. में कार्यरत, हिन्दी साहित्य के पठन एवं लेखन में रुचि। संगीत एवं फोटोग्राफी में अतिरिक्त रुचि।
  • प्रकाशन- आकाशवाणी लखनऊ द्वारा पुरस्कृत, 'गहमर वेलफेयर सोसाइटी' द्वारा गीत–लेखन में प्रशस्ति–पत्र, आकाशवाणी इलाहाबाद से कविताओं एवं हास्य–व्यंग्य वार्ताओं का प्रसारण, आकाशवाणी फैजाबाद से अतिथि कलाकार के रूप में प्रसारित(संगीत–विधा)एवं अनेक मंचों से काव्य–पाठ। गोंडा बलरामपुर की प्रतिनिधि साहित्यिक पत्रिका 'पलाश' के शताब्दी विशेषांक में कुछ गीत एवं कविता, प्रतिष्ठित पत्रिका 'साहित्य समीर दस्तक' में गीत, रामपुरा जालौन से प्रकाशित सहयोगी संकलन 'दामाने–ज़िन्दगी',अलीगढ़ से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका 'शब्द–सरिता' एवं प्रतापगढ़ से प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह 'स़हर' में कुछ ग़ज़लें, प्रतापगढ़ से प्रकाशित एक अन्य संकलन 'काव्य–वाटिका' में मुक्तक, छंद, छंदमुक्त, ग़ज़लें एवं गीत विधा में रचनायें और विभिन्नपत्र पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन। अंतर्जाल की प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय ई–पत्रिका 'अनुभूति', मनकापुर गोंडा से प्रकाशित ई–पत्रिका 'साहित्य–रागिनी', बीकानेर से प्रकाशित ई–पत्रिका 'कवि–मन' एवं लखनऊ से प्रकाशित ई–पत्रिका 'शब्द–व्यंजना' में रचनाओं कानिरंतर प्रकाशन एवं ई–पत्रिका 'अभिव्यक्ति' में हास्य–व्यंग्य का प्रकाशन। गोष्ठियों एवं स्थानीय मंचों पर सक्रिय उपस्थिति।

7 टिप्‍पणियां:

  1. देहरी, दरवाजों, छज्जों पर चहक रही
    चिड़िया जैसी हैं
    सोच बदलकर देख सको
    तो बहुयें भी बिटिया जैसी हैं.....
    बहुत सुन्दर..... बधाई!

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    1. रचना पर आने और प्रतिक्रिया देने के लिये आपका हार्दिक आभार आदरणीय सुधीर सक्सेना सुधी जी

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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