मंगलवार, 16 सितंबर 2014

दो कविताएं-शशि पुरवार



चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार


अंतर्मन


अंतर्मन एक ऐसा बंद  घर
जिसके अन्दर रहती है
संघर्ष करती हुई जिजीविषा,
कुछ ना कर पाने की कसक
घुटन भरी साँसे
कसमसाते विचार और
खुद से झुझते हुए सवाल ।
झरोखे की झिरी से आती हुई
प्रफुल्लित रौशनी में नहाकर
आतंरिक पीड़ा तोड़ देना चाहती है
इन दबी हुई सिसकती
बेड़ियों  के बंधन को ,
सुलगती हुई तड़प
लावा बनकर फूटना चाहती है
बदलना चाहती है,उस
बंजर पीड़ा की धरती को,
जहाँ सिर्फ खारे पानी की
सूखती नदी है
वहाँ हर बार वह रोप देती है
आशा के कुछ बिरबे ,
सिर्फ इसी आस में
कि कभी तो  बंद  दरवाजे के भीतर
ठंडी हवा का ऐसा झोखा आएगा
जो साँसों में ताजगी भरकर
तड़प को खुले
आसमान में छोड़ आएगा
और अंतर्मन के घर में होंगी
झूमती मुस्कुराती हुई खुशियां
नए शब्दों की महकती व्यंजना
नए विचारो का आगमन
एवं कलुषित विकारो का प्रस्थान।
एक नए अंतर्मन की स्थापना
यही तो है अंतर्मन की विडम्बना .


सुलग रहे थे ख्वाब


सुलग रहे थे ख्वाब
वक़्त की
दहलीज पर
और
लम्हा लम्हा
बीत रहा था पल
काले धुएं के
बादल में।
सीली सी यादें
नदी बन बह गयी ,
छोड़ गयी
दरख्तों को
राह में
निपट अकेला।
फिर
कभी तो चलेगी
पुरवाई
बजेगा
निर्झर संगीत
इसी चाहत में
बीत जाती है सदियाँ
और
रह जाते है निशान
अतीत के पन्नो में।
क्यूँ
सिमटे हुए पल
मचलते है
जीवंत होने की
चाह में।
न कोई  ठोर
न ठिकाना

न तारतम्य
आने वाले कल से।
फिर भी
दबी है चिंगारी
बुझी हुई राख में।
अंततः
बदल जाते है
आवरण,
पर

नहीं बदलते
कर्मठ ख्वाब,
कभी तो होगा
जीर्ण युग का अंत
और एक
नया आगाज।




शशि पुरवार



  • जन्म तिथि-22 जून,1973
  • जन्म स्थान-इंदौर ( म.प्र.)
  • शिक्षा- स्नातक उपाधि-बी. एस. सी.(विज्ञानं)
  •      स्नातकोत्तर उपाधि-एम .ए (राजनीती शास्त्र)
  •      (देविअहिल्या विश्वविद्यालय,इंदौर)
  • तीन वर्ष का  हानर्स  डिप्लोमा इन कंप्यूटर साफ्टवेयर
  • भाषा ज्ञान-हिंदी अंग्रेजी,मराठी
  • प्रकाशन-कई प्रतिष्ठित समाचारपत्र और पत्रिकाओ व साहित्यिक पत्रिकाओ में रचनाए,गीत, लेख,लघुकथा, कविता का प्रकाशन होता रहता है. 
  • दैनिक भास्कर,बाबूजी का भारत मित्र,समाज कल्याण पत्रिका,हिमप्रस्थ,साहित्य दस्तक,लोकमत,नारी,गीत गागर,जाग्रति,वीणा,अविराम,हाइकु लोक,अभिनव इमरोज, दैनिकजागरण,निर्झर टाइम्स,दरभंगा टाइम्स,रूबरू दुनियां,उदंती,उत्तर प्रदेश सरकार-लखनऊ,हरिगंधा,हिंदी चेतना,युग गरिमा,उत्कर्ष प्रकाशन,मधुरिमा,विधान केसरी, वृत मित्र, दैनिक जागरण,सरिता आदि पत्र व पत्रिकाओ मेंप्रकाशन.
  • अंतर्जाल पर कई पत्रिकाओ में नियमित प्रकाशन होता है .हिंदी हाइकु ,अनुभूति,त्रिवेणी,कविमन,परिकल्पना,प्रयास पत्रिका,सहज साहित्य,साहित्य शिल्पी,गद्य कोष पर भी रचनाएँ पढ़ी जा सकती है.
  • प्रकाशित पुस्तकें-साझा संकलन-
  • -नारी विमर्श के अर्थ
  • -उजास साथ रखना - साझा चोखा संकलन,
  • -त्रिसुगंधी काव्य संकलन 
  • -आधी आबादी-साझा हाइकु संकलन
  • -शोध दिशा फेसबुक कविता अंक   एवं संकलन 
  • पुरस्कार-हिंदी विश्व संस्थान और कनाडा से प्रकाशित होने वाली प्रयास पत्रिका के सयुंक्त तत्वाधान में आयोजित देशभक्ति प्रतियोगिता में 2013 की विजेता.
  • कार्येक्षेत्र-बचपन से ही साहित्य के प्रति रुझान रहा है. पहली रचना 13वर्षकी उम्र में लिखी. बचपन से ही मन की संवेदनाओ को पन्नो पर उकेरना पसंद रहा है. धीरे-धीरे कागज़-कलम जीवन के अभिन्न अंग बन गए। साहित्यिक विरासत माँ से मिली .जीवन भर विद्यार्थी रहना ही पसंद है.रचनात्मकता और कार्य शीलता ही पहचान है .
  • कहानी,कविता,लघुकथा, काव्य की अलग अलग विधाए- गीत,नवगीत, दोहे,कुण्डलियाँ,  गजल,छन्दमुक्त, तांका, चोका, माहिया, हाइकु और लेखों के माध्यमसे जीवन के बिभिन्न रंगों को उकेरना पसंद है.सपने  नाम से एक ब्लॉग भी लिखती हूँ.
  • blog- http://sapne-shashi.blogspot.com
  • संपर्क-email- shashipurwar@gmail.com

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