शनिवार, 20 सितंबर 2014

दो कविताएं-पुष्पराज चसवाल



चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार

जीवन-ज्योति 


आओ
हम उन्हें
एक और ज़िन्दगी की
राह दिखाएँ
उन्हें
जो जीने के रास्ते
भूल चुके हैं या
बंद समझ चुके हैं,
आओ
हम उन्हें
बताने की कोशिश करें
जीवन-ज्योति
क्रिश्चन कैलेंडर में
या
विक्रमी संवत में
क़ैद, मापदंड नहीं
जीवन-ज्योति
अखंड ज्योति है
सहस्र सूर्यों से परे
क्षितिज की सभी
सीमाओं के पार
अलौकिक नृत्य में
मगन, पार
मानवीय पकड़ के।


दिशा-ज्ञान 


ओ धरा के जीव,
युगों से बनकर व्योम-पक्षी
व्योम-फूल से बातें करते -
थके नहीं हो क्या?

आदिकाल से
अंतकाल तक
विचरते
एक छोर से
सहस्र छोर तक भटकते
है कौन
चिरंतन सत्य
या विलक्षण सत्ता
तुमने जाना?

खो जाने में,
जो मिलता है -
देख चुके हो!
पा जाने में,
क्या मिलता है-
कैसे जानो?

मानव हो तुम,
मानवी है धरा।
लिए कर में -
अमृत-कलश,
कब से तुम्हें पुकारती
अंतरंग निहारती,
पालकी सजी-सजी,
आ रही पहचान-सी,
भ्रम को छोड़ो!
लौट भी आओ
इस धरती से
नाता जोड़ो।
युगों से जिसको
ढूंढ रहे हो,
पा जाओगे
क्षण भर में ही,
वह अमरत्व -
वह दुर्लभ जीवन रस।



पुष्प राज चसवाल



  • जन्म तिथि: 1944-06-13
  • जन्म स्थान: गाँव ददवाल, ज़िला रावलपिंडी (अब पाकिस्तान में)
  • शिक्षा: B.A., M.B.A.
  • प्रकाशित कृतियाँ: "दिशाएं" (काव्य- संग्रह, १९९१), "संवेदनाओं के घेरे" (काव्य -संग्रह, २००१) "कर्म-क्षेत्र" (उपन्यास, २००९)
  • लेखन: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ, कहानियां निरंतर प्रकाशित मुख्यतः हरिगंधा (पंचकूला, हरियाणा), शब्द सरोकार (पटियाला,पंजाब) इंगित (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), सफ़र ज़ारी है (तश्नगाने-अदब, दिल्ली),  पुष्पगन्धा (अम्बाला,हरियाणा), वीर प्रताप (जालंधर,पंजाब), दैनिक ट्रिब्यून (चंडीगढ़, यू टी);
  • पी.पी. प्रकाशन द्वारा ६ किताबों के प्रकाशन में सक्रिय भूमिका; हिंदी के त्रैमासिक ई-पत्रिका 'अनहद कृति' (www.anhadkriti.com) में सक्रिय लेखन एवं सम्पादन।
  • जालघर पर 'स्वर्गविभा' में कविताएं।
  • सम्प्रति: बैंक ऑफ़ बड़ोदा से २००१ में प्रबंधक पद से अवकाश-प्राप्त; पी. पी. प्रकाशन में मुख्य-संस्थापक; वर्ष २०१३ में जीवनसंगिनी डॉ प्रेम लता चसवाल 'प्रेम पुष्प'  के साथ पी.पी.प्रकाशन (अम्बाला, शहर) के अंतर्गत - हिंदी साहित्य, कला एवं सामजिक सरोकारों की ई-पत्रिका 'अनहद-कृति' की संस्थापना और अब 'अनहद कृति' ई-त्रैमासिकी में सक्रीय लेखन एवं सह-सम्पादन।
  • रुचियाँ: इतिहास पठन, साहित्य पठन-पाठन, वाद-विवाद, काव्य पाठ, और नाट्य मंचन के साथ राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सरोकारों के बारे में जानकारी पाने में गहरी रूचि; महत्वपूर्ण ऐतिहासिक हस्तियों के भाषणों का अंग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद। 
  • सम्मान: तीसरी कक्षा में ही १९५३ (1953) में प्रधान-मंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू व इंगलैंड के प्रधान-मंत्री हेराल्ड मैकमिलन के समक्ष 'आदर्श ग्राम'  में लघु नाटिका में नायक की भूमिका, चौथी कक्षा से लेकर स्नातक की परीक्षाओं में उत्कृष्टता छात्रवृत्ति से सम्मानित, कॉलेज के दिनों में यूथ-फेस्टिवल एवं अंतर-महाविद्यालय काव्य-पाठ, भाषण प्रतियोगिताओं व नाट्य-मंचन में कई बार प्रथम पुरस्कार, विशेषकर उल्लेखनीय है वर्ष १९६५ में बटाला में आयोजित अंतर-महाविद्यालय काव्य-पाठ प्रतियोगिता में पंजाबी के कवि शिरोमणि शिव कुमार बटालवी द्वारा पुरस्कृत, पंजाब विश्वविद्यालय, यूथ वेलफेयर विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण-कैम्प के बाद कॉलेज में यूथ लीडरशिप ऐसोसिएशन (वाई.एल ए) के संस्थापक प्रधान १९६५ (1965),  बैंक ऑफ़ बड़ोदा, दिल्ली अंचल द्वारा हिंदी-दिवस पर आयोजित समारोह में लगातार तीन वर्ष तक अनुवाद में प्रथम पुरस्कार १९८४-८६ (1984-86); "दिशाएं" १९८८ (1988)एवं "संवेदनाओं के घेरे" २००१ (2001) का प्रकाशन हरियाणा साहित्य अकादमी के सहयोग से; हरियाणा साहित्य अकादमीद्वारा आयोजित हरियाणा भ्रमण यात्रा में अम्बाला के प्रतिनिधि रचनाकार के रूप में प्रतिनिधित्व, बैंक ऑफ़ बड़ोदा कर्मचारी संगठन (पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर,चंडीगढ़ क्षेत्र) में पंद्रह वर्ष तक प्रधान एवं महासचिव के रूप में सक्रिय भूमिका;  वर्ष १९७०-८० (1970 -80) के दशक में गुड़गांव में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों में सक्रिय भूमिका, वर्ष १९७०-८० (1970-80) व १९८०-९० (1980-90) में गुडगाँव, करनाल, अम्बाला में कई श्रमिक संगठनों में भागीदारी; कर्मचारी संगठन सभाओं में प्रभावशाली वक्ता; २००५ (2005) में यूनिवर्सिटी ऑफ़ विस्कॉन्सिन (संयुक्त राज्य अमरीका) में आयोजित "कांफ्रेंस ओन साउथ एशिया" में "लिट्रेसी इंक्रीज़िज़ द पेस ऑफ़ डेवेलपमेंट: एन इंडियन एग्ज़ाम्पल" वार्ता में मुख्य वक्ता; ऑल इंडिया रेडियो शिवपुरी, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) तथा कुरुक्षेत्र (हरियाणा) से काव्य-पाठ एवं वार्ता का प्रसारण।
  • ईमेल: prchaswal@gmail.com

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