शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

काव्य-उन्मेष-उत्सव







एक अनूठा ऑनलाइन साहित्यिक उत्सव 



'अनहद कृति' हिंदी की त्रैमासिक ई-पत्रिका के प्रथम वार्षिक साहित्यिक ऊर्जायन का काव्य-उन्मेष-उत्सव इन दिनों चल रहा है। 'अनहद कृति' की शुरुआत जिन उद्देश्यों को लेकर की गई, उनमें "हिन्दी साहित्य, संस्कृति एवं कला की गहन, निरंतर और व्यापक अमूल्य निधि में अपने सार्थक प्रयत्नों द्वारा वैश्विक स्तर पर साहित्य साधकों को संगठित करके हिंदी भाषा का समुचित संरक्षण, संवरण, विकास एवं विस्तार करना और साहित्य सृजन के महत कार्य में अपने-अपने सरोकारों से रचनाशीलता में जुड़े सभी कर्मठ, साहित्य एवं कला के प्रति कटिबद्ध रचनाकारों को एक सांझे मंच पर लाकर उनकी रचनाओं को विश्वस्तरीय पहचान करवाना हमारा परम लक्ष्य रहा है। इसके साथ ही उभरते रचनाकारों का स्वागत करना व उन्हें सृजन के लिए प्रेरित-प्रोत्साहित करना भी हमारा उद्देश्य है।"

'अनहद कृति' का नियमित संचालन व विकास उन्हीं उद्देश्यों के अंतर्गत किया जा रहा है और इसके सुखद परिणाम भी दृष्टव्य हैं कि इसके कलेवर, रचनाकारों, पाठकों व विभिन्न देशों तक पहुँच में निरंतर वृद्धि हो रही है। फिर भी हिन्दी का समुचित विकास एवं विस्तार, इस के अतिरिक्त भी हमसे कुछ अन्य प्रयासों की मांग करता है, जिसके लिए हम समय-समय पर नए लक्ष्य संधान करके इस कार्य को और उत्साहपूर्वक सबको सम्मिलित करने के प्रयास कर रहे हैं। फेस-बुक, लिंकडिन और ट्विटर से अधिक से अधिक हिंदी-प्रेमियों तक हमने अपनी पहुँच बढ़ाई है। रचनाकारों में साहित्य-संवर्धन हेतु नया ओज व ऊर्जा भरने के लिए 'अनहद कृति के वार्षिक साहित्यिक ऊर्जायन' का प्रारम्भ भी उन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति में एक प्रयास है।

'अनहद कृति' वैश्विक स्तर पर हिंदी के विद्वत समाज एवं रचनाकारों को विशुद्ध साहित्यिक दृष्टि से सांझे मंच पर लाकर उन्हें उत्कृष्ट पहचान दिलवाने के लिए प्रयत्नशील है। इसी के अंतर्गत 'काव्य-उन्मेष' स्पर्धा उत्सव की घोषणा 'हिंदी दिवस' पर की गई, इस प्रतिस्पर्धा की रूपरेखा ऐसी बनायी गयी है कि यह लेखक, पाठक और रचना का एक सामूहिक उत्सव बन सके।

हिंदी साहित्य जगत में यह पहला ऐसा प्रयास है-
जिसमें कि काव्य-उत्कृष्टता का किसी अन्य पहचान की मोहताज न होकर विशुद्ध गुणवत्ता पर परखे जाने का प्रावधान किया जाएगा तथा प्रतिभागी रचनाकारों के नाम को या उनकी अन्य पहचान को निर्णय आने तक पूर्णतः गोपनीय रखा जाएगा। 'अनहद कृति' निष्पक्ष निर्णय से ऐसी रचनाशीलता को ढूंढने की पक्षधर है जो किसी पहचान, रसूख या लिप्सा की मोहताज न होकर विशुद्ध उत्कृष्टता पर निर्भर होगी। इसके लिए ४ माह तक प्रतिभागियों से रचनाएं एकत्रित की जाएंगी फिर ३ माह तक सभी सम्मिलित की गई कविताओं को पाठकों द्वारा मूल्यांकन के लिए उपलब्ध करवा दिया जाएगा। जो भी पाठक जज बनना चाहेंगे, उन्हें लगभग सभी कविताओं को अपनी समय सुविधा से पढ़ कर नियमानुसार अपना निर्णय प्रेषित करना होगा।
और, स्पर्धा के निर्णय में ३०% भागीदारी 'अनहद कृति' के सुधि पाठकों की होगी जिसके लिए सभी सम्मिलित की गई कविताओं को 'अनहद कृति' के खुले मंच पर डाल दिया जाएगा ताकि पाठक उन रचनाओं पर निःसंकोच अपना मत व्यक्त करने के अधिकारी हों। 'अनहद कृति' काव्य- उन्मेष को एक उत्सव की तरह आयोजित करना चाहती है जिसमें सभी की उत्साहपूर्ण सहभागिता हो। इसमें पाठक से अभिप्राय किसी विशेष वर्ग से नहीं, रचनाकार या लेखक भी एक अच्छा पाठक हो सकता है, बल्कि उसे एक अच्छा पाठक अनिवार्यतः होना ही चाहिए। ज़रा सोचिये, जब एक प्रतिभागी खुद ही अपनी व दूसरों की रचनाओं के मूल्यांकन करने में सहभागिता करेगा तो निश्चित रूप से वह अपनी कृति के गुण-दोषों को भी सहज ही जान पाएगा।

इसके लिए काव्य-उन्मेष-उत्सव को तीन चरणों में विभाजित किया गया है:
प्रथम चरण: लेखन का उन्माद: १० अक्टूबर, २०१४ - २० जनवरी, २०१५ - इसके दौरान रचनाकार अपनी काव्य-कृतियाँ प्रेषित करेंगे और पाठक अपना नाम प्रेषित करेंगे पाठक-जज बनने हेतु।
दूसरा चरण: पाठक सर्वोपरि: २१ जनवरी, २०१५ - २० अप्रैल, २०१५ - इस अवधि के दौरान पाठक-जज अपने समयानुसार कविताओं को पढ़ेंगे और निर्धारित मानदण्डों पर उनको आकलित करेंगे।
तीसरा चरण: लेखक-पाठक-सम्मान: २३ जून २०१५ - २३ सितम्बर, २०१५ - हिंदी-दिवस २०१५ के काव्य-उन्मेष-उत्सव अंक में लेखक-पाठक-रचना का सम्मान एक हृदयग्राही कलात्मक अंक में एवं "काव्य प्रतिष्ठा सम्मान" की घोषणा एवं उसके अंतर्गत विशेष-रचनकार-परिशिष्ट; इसी अंक से होंगे रचनाकार एवं पाठक-जज रू-ब-रू!

'काव्य-उन्मेष उत्सव' से हिन्दी भाषा व हिन्दी साहित्य के संवर्धन में 'अनहद कृति' से जुड़े साहित्यकार बंधु, सहृदय पाठक एवं विश्वभर में फैले हिन्दी प्रेमी इसे सफल बनाने में सक्रिय व सार्थक भूमिका निभा रहे हैं, काव्य-उन्मेष के पन्नों पर जा इस साहित्य-उत्सव के बारे में हो रही बातचीत का आनंद लें - (http://www.anhadkriti.com/competition.php)।

हिंदी दिवस २०१४ से शुरू हो हिंदी दिवस २०१५ तक चलने वाले इस अनूठे ऑनलाइन साहित्यिक उत्सव का लिंक है - http://www.anhadkriti.com/competition.php - आज ही कृपया पन्नों पर विस्तार से दिए गए उद्देश्य, लेखक नियमावली, पाठक-जज नियमावली, मूल्यांकन प्रक्रिया, काव्य प्रतिष्ठा सम्मान एवं कविताएं भेजने के बारे में पढ़ें और इस शब्द-यज्ञ में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें - लेखक, पाठक-जज या पाठक के रूप में। तो, आप पाठक हैं या लेखक साल भर की इस साहित्यिक यात्रा में 'काव्य-उन्मेष-उत्सव' पर हमारे साथ चलें नए साहित्यिक आयाम खोजने, नयी मंज़िलें नापने।


आपकी साहित्यिक ऊर्जा की अभिलाषा में,
सहयोगाकांक्षी,

पुष्प राज चसवाल एवं डॉ प्रेम लता चसवाल 'प्रेम पुष्प'

संपादक द्वय: अनहद कृति
(www.anhadkriti.com)
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