गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

धीरज श्रीवास्तव के गीत




चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार




बदल गये हैँ मंजर सारे..



बदल गये हैँ मंजर सारे
बदल गया है गाँव प्रिये!

मोहक ऋतुएँ नहीँ रही अब
साथ तुम्हारे चली गईँ!
आशाएँ भी टूट गईँ जब
हाथ तुम्हारे छली गईँ!
बूढ़ा पीपल वहीँ खड़ा पर
नहीँ रही वो छाँव प्रिये!

पोर पोर अंतस का दुखता
दम घुटता पुरवाई मेँ!
रो लेता हूँ खुद से मिलकर
सोच तुम्हेँ तन्हाई मेँ!
मीठी बोली भी लगती है
कौए की अब काँव प्रिये!

चिट्‌ठी लाता ले जाता जो
नहीँ रहा वो बनवारी!
धीरे धीरे उज़ड़ गये सब
बाग बगीचे फुलवारी!
बैठूँ जाकर पल दो पल मैँ
नही रही वो ठाँव प्रिये!

पथरीली राहोँ के ठोकर
जाने कितने झेल लिए!
सारे खेल हृदय से अपने
बारी बारी खेल लिए!
कदम कदम पर जग जीता हम
हार गये हर दाँव प्रिये!

पीड़ा आज चरम पर पहुँची
नदी आँख की भर आई!
दूर तलक है गहन अँधेरा
और जमाना हरजाई!
फिर भी चलता जाता हूँ मैँ
भले थके हैँ पाँव प्रिये!



अम्मा तुम तो चली गई..



अम्मा तुम तो चली गई पर
लाल तुम्हारा झेल रहा!
जैसे तैसे घर की गाड़ी
अपने दम पर ठेल रहा!

बैठ करे पंचायत दिन भर
सजती और सँवरती है!
जस की तस है बहू तुम्हारी
अपने मन का करती है!
कभी नहीँ ये राधा नाची
कभी न नौ मन तेल रहा!

राधे बाबा का लड़का तो
बेहद दुष्ट कसाई है!
संग उसी के घूमा करता
अपना छोटा भाई है!
सोचा था कुछ पढ़ लिख लेगा
उसमेँ भी ये फेल रहा!

खेत कर लिया कब्जे मेँ है
बोया उसमेँ आलू है!
लछमनवा से मगर मुकदमा
वैसे अब तक चालू है!
जुगत भिड़ाया तब जाकर वो
एक महीने जेल रहा!

चलो कटेगा जैसे भी अब
आशीर्वाद तुम्हारा है!
और भरोसा ईश्वर पर है
उसका बहुत सहारा है!
खेल खिलाता वही सभी को
और जगत ये खेल रहा!



बस है तेरी आस..



मौत कहाँ तू छिपकर बैठी
आ जा मेरे पास!
इधर जिन्दगी दगा दे रही
बस है तेरी आस!

जितने भी थे सच्चे साथी
धीरे धीरे बिछड़ गये!
हम इस जग के स्वार्थ दौड़ मेँ
धीरे धीरे पिछड़ गये!
धूप जेठ की तन झुलसाती
गुजर गया मधुमास!

अब तो सर्दी बनी बहुरिया
रह रह सुई चुभोती है!
और कामना हरदम मेरी
बच्चोँ जैसी रोती है!
खुद अपने ही साये से अब
टूट गया विश्वास!

आये दिन चिकचिक के चलते
बेटो ने है बाँट दिया!
बिस्तर विस्तर दिया एक ने
और एक ने डाँट दिया!
लिखना पढ़ना देख मुहल्ला
कहता कालीदास!

मौका मिलते मुझे चिकोटे
पसरा है सन्नाटा जो!
दिल पर पत्थर रखकर सहता
वक्त लगाये चाटा जो!
रोज रोज मन मरघट जाकर
ढ़ूँढ़ रहा उल्लास!


धीरज श्रीवास्तव


ए-259 संचार विहार कालोनी,
आई.टी.आई मनकापुर, गोण्डा (उ.प्र)
पिन-271308
फोन-08858001681

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