मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

दस्तक: दो कविताएं - नरेश अग्रवाल



चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार



कविता  



कविता का  सृजन
भावनाओं का उदद्वेलन
विचारों का सम्पादन
शब्दों का रसवादन

कहीं बलवती भावनाएं
कहीं विचारों की अठखेलियाँ
कहीं त्वरित होती संवेदनाएं
कहीं शब्दों की पहेलियाँ

कहीं आत्मा की अभिव्यक्ति
कहीं मन की विरक्ति
कहीं चित मे उतरता संतोष
कहीं प्यार या आसक्ति

कहीं व्याकुल मन की वेदना
कहीं निरंतर बहती धार
कहीं मूक अकेली शून्य मे
कहीं कविता एक संसार..

कहीं कविता एक संसार...    
                                    


इंतेहा क्या है..


इंतेहा क्या है समझ नहीं पा रहा
इंतेहा क्या है जान नहीं पा रहा
इंतेहा क्या है बूझ नहीं पा रहा
इंतेहा भी होती है,ये मान नहीं पा रहा

गर्मी की जलती दोपहरी मे
रेत के ढेर से उडते हुये कण
चले छूने आसमान हवा संग
मोह लेते है सब का मन

या ऊंचाई से बूंद पानी की जो
गिरती पत्थर पर छन छन
समुन्द्र मे अठखेलियाँ लेती लहरें
भोगो देतीं है सब तन और मन

चिड़िया जो बैठी  एक पेड़ की
उस ऊंची सूखी डाल के छोर पे
या लिपटी कई पतंगे, आसमान
को छूती उस पतंग की डोर से

या उस बूढ़े आदमी के चेहरे पे
आई झुरियों की कई गहरी लकीरें
या सदियो से अंधेरे मे गुम
और धूल से सनी वो तस्वीरें

चिड़िया की चोंच मे दबा
तिनका वो सूखी घास का
या नल से गिरती बूंद को
पीने को तरसता वो उदास सा

या सितार की मचलती तार
का गूँजता वो मधुर संगीत
कई नगमे उसकी बांसुरी छेड़ दे
बंद आंखो से सुनना वो गीत

बीस मंज़िला इमारत के छोर से
उस खिड़की के खुले पट देखना
या फटे टायर के झरोखे से
उस गांव को लटपट देखना

उन पंछियों का उड़ना झुंड मे
आसमान पे झूमना मचलना
या बाग मे खेलते बच्चों का
उस फिसलपटी से फिसलना

एक्सट्रीम क्या है,इंतेहा क्या है
मैं जरा समझ नहीं पाता हूँ
जिस तरफ देखूँ इंतेहा ही है
यही देख यही सुन पाता हूँ..


नरेश अग्रवाल

45, बाबजी पार्क,रिंग रोड-2,
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ (भारत)
फोन: 91-9425530514
ईमेल: nareshkumar1992@yahoo.co.in

नरेश अग्रवाल

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) निवासी नरेश अग्रवाल पेशे से एक बीमा सर्वेक्षक एवं हानि निर्धारक होने के साथ ही यांत्रिकी अभियंता हैं| वे मूल रूप से एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिलेटलिस्ट हैं और अनेक विश्व स्तरीय डाक टिकट संग्रह प्रतियोगिताओं में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व कर बहुत से अवॉर्ड्स भी जीते हैं| फिलेटेलिक लेखन में उन्हें महारत हासिल है| उनके फिलेटेली लेखों का नियमित प्रकाशन प्रतिष्ठित पत्रिकाओं-रेनबो स्टाम्प न्यूज, वाडोफिल , इंडिया पोस्ट आदि में नियमित रूप होता रहता है| काव्य लेखन में भी उनकी बहुत रुचि है| उनकी कविताओं का प्रकाशन कई स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में होता रहा है| उनकी रचनाएं निजी अनुभतियों के साथ ही सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी हुईं हैं और संभावनाएं जगाती हैं|






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