शनिवार, 24 जनवरी 2015

ऋषभदेव शर्मा की रचनाएँ



चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार


भारत माता का जयगान..




दिशा-दिशा में गूँज रहा है, भारत माता का जयगान!
भारत का संदेश विश्व को, मानव-मानव एक समान!!

यहाँ सृष्टि के आदि काल में, समता का सूरज चमका,
करुणा की किरणों से खिलकर, धरती का मुखड़ा दमका!
सुनो! मनुजता को हमने ही, आत्म त्याग सिखलाया है,
लालच और लोभ को तजकर, पाठ पढ़ाया संयम का!!

जो जग के कण-कण में रहता, सब प्राणी उसकी संतान!
भारत का संदेश विश्व को, मानव-मानव एक समान!!

रहें कहीं हम लेकिन शीतल, मंद सुगंधें खींच रहीं
यह धरती अपनी बाँहों में, परम प्रेम से भींच रही!
सारे धर्मों, सभी जातियों, सब रंगों, सब नस्लों को,
ब्रह्मपुत्र, कावेरी, गंगा, कृष्णा, झेलम सींच रहीं!!

ऊँच नीच का भेद नहीं कुछ, सद्गुण का होता सम्मान!
भारत का संदेश विश्व को, मानव-मानव एक समान!!

हमने सदा न्याय के हक़ में, ही आवाज़ उठाई है,
अपनी जान हथेली पर ले, अपनी बात निभाई है!
पुरजा-पुरजा कट मरने की, सदा रखी तैयारी भी,
वंचित-पीड़ित-दीन-हीन की, अस्मत सदा बचाई है!

जन-गण के कल्याण हेतु हम, सत्पथ पर होते बलिदान!
भारत का संदेश विश्व को, मानव-मानव एक समान!!

जिसके भी मन में स्वतंत्रता, अपनी जोत जगाती है,
जो भी चिड़िया कहीं सींखचों, से सिर को टकराती है!
वहाँ-वहाँ भारत रहता है, वहाँ-वहाँ भारत माता,
जहाँ कहीं भी संगीनों पर, कोई निर्भय छाती है!

आज़ादी के परवानों का, सदा सुना हमने आह्वान!
भारत का संदेश विश्व को, मानव-मानव एक समान!!

सब स्वतंत्र हैं, सब समान हैं, सब में भाईचारा है,
सब वसुधा अपना कुटुंब है, विश्व-नीड़ यह प्यारा है!
पंछी भरें उड़ान प्रेम से, दिग-दिगंत नभ को नापें,
कहीं शिकारी बचे न कोई, यह संकल्प हमारा है!

युद्ध और हिंसा मिट जाएँ, ऐसा चले शांति अभियान!
भारत का संदेश विश्व को, मानव-मानव एक समान!!

जल में, थल में और गगन में मूर्तिमान भारतमाता,
अधिकारों में, कर्तव्यों में, संविधान भारतमाता!
हिंसासुर के उन्मूलन में, सावधान भारतमाता,
'विजयी-विश्व तिरंगा प्यारा', प्रगतिमान भारतमाता!!

मनुष्यता की जय-यात्रा में, नित्य विजय, नूतन उत्थान!
भारत का संदेश विश्व को, मानव-मानव एक समान!!

दिशा-दिशा में गूँज रहा है, भारत माता का जयगान!
भारत का संदेश विश्व को, मानव-मानव एक समान!!




देश स्मरण 



गंध बह कर आ रही है
महकता है याद में भी
वह हवन का धूम

शंख के संग गूँजती है
ध्वनि अजानों की
खिल रहा है शब्द से आज्ञाकमल

प्राण में जागे असुर को रौंदती
युद्ध की देवी विचरती
रक्त पीती शत्रु का निर्भीक

लोग मरते-मारते
पर कहाँ धरती किसी की?
तैरता सच यह युगों के पार

जब  कभी होता अकेला मन
भीड़ में, परदेस में भी
जाग उठता देश-घर अपना

देश केवल स्थल नहीं
जन भी नहीं है देश
देश है संबंध का विस्तार

खोजते फिरते रहो
विश्व के बाज़ार में
देश अपने घोंसले में चहचहाता है!




ऋषभदेव शर्मा 




  • जन्म : 04 जुलाई 1957, ग्राम गंगधाडी, जिला मुजफ्फर नगर, उत्तर प्रदेश.
  • शिक्षा : एम.ए. (हिंदी), एम.एस.सी. (भौतिकी), पीएच.डी. (उन्नीस सौ सत्तर के पश्चात की हिंदी कविता का अनुशीलन).
  • कार्य : 1983-1990 : जम्मू और कश्मीर राज्य में गुप्तचर अधिकारी (इंटेलीजेंस ब्यूरो, भारत सरकार).
  • 1990-1997 : प्राध्यापक. 1997-2005 : रीडर. 2005 से प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा.
  • प्रकाशन : काव्य संग्रह – 1. तेवरी (1982), 2. तरकश (1996), 3. ताकि सनद रहे (2002), 4. देहरी (स्त्रीपक्षीय कविताएँ, 2011), 5. प्रेम बना रहे (2012), 6. सूँ साँ माणस गंध (2013), 7. धूप ने कविता लिखी है (तेवरी-समग्र, 2014).
  • [‘प्रेम बना रहे’ कविता संग्रह के 2 तेलुगु अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं - :प्रिये चारुशीले (डॉ. भागवतुल हेमलता, 2013), प्रेमा इला सागिपोनी (जी. परमेश्वर, 2013)],
  • आलोचना – 1. तेवरी चर्चा (1987), 2. हिंदी कविता : आठवाँ नवाँ दशक (1994), 3. कविता का समकाल (2011), 4. तेलुगु साहित्य का हिंदी पाठ (2013).
  • अनुवाद चिंतन – साहित्येतर हिंदी अनुवाद विमर्श (2000).
  • संपादन : पुस्तकें – भाषा की भीतरी परतें (भाषाचिंतक प्रो.दिलीप सिंह अभिनंदन ग्रंथ, 2012), शिखर-शिखर (डॉ.जवाहर सिंह अभिनंदन ग्रंथ), हिंदी कृषक (काजाजी अभिनंदन ग्रंथ), माता कुसुमकुमारी हिंदीतरभाषी हिंदी साधक सम्मान : अतीत एवं संभावनाएँ (1996), भारतीय भाषा पत्रकारिता (2000), स्त्री सशक्तीकरण के विविध आयाम (2004), उत्तरआधुनिकता : साहित्य और मीडिया (2013), प्रेमचंद की भाषाई चेतना, अनुवाद का सामयिक परिप्रेक्ष्य (1999, 2009), अनुवाद : नई पीठिका - नए संदर्भ, कच्ची मिट्टी  2, पुष्पक 3 और 4, पदचिह्न बोलते हैं. पत्रिकाएँ – संकल्य (त्रैमासिक) : दो वर्ष, पूर्णकुंभ (मासिक) : पाँच वर्ष : सहायक संपादक, महिप (त्रैमासिक) : सहयोगी संपादक, आदर्श कौमुदी : तमिल कहानी विशेषांक, कर्णवती : समकालीन तमिल साहित्य विशेषांक, भास्वर भारत : संयुक्त संपादक.
  • मूलतः कवि. 1980 में तेवरी काव्यांदोलन (आक्रोश की कविता) का प्रवर्तन. अनेक शोधपरक समीक्षाएँ एवं शोधपत्र प्रकाशित. शताधिक पुस्तकों के लिए भूमिका-लेखन. आंध्रप्रदेश हिंदी अकादमी के ‘हिंदीभाषी हिंदी लेखक पुरस्कार - 2010’ द्वारा सम्मानित, ‘रमादेवी गोइन्का हिंदी साहित्य सम्मान - 2013’ से सम्मानित. डीलिट, पीएचडी और एमफिल के 125 शोधकार्यों का निर्देशन.
  • संप्रति : प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, खैरताबाद, हैदराबाद – 500004.
  • संपर्क : 208 ए, सिद्धार्थ अपार्टमेंट्स, गणेश नगर, रामंतपुर, हैदराबाद – 500013.मोबाइल : 08121435033
  • ईमेल : rishabhadeosharma@yahoo.com

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