गुरुवार, 8 जनवरी 2015

अवधेश सिंह की कविताएं



विनोद शाही की कलाकृति


सफर 



 (एक)


मृत्यु के बाद का सफर
क्या पता कहाँ जाना है
किस मंजिल को
क्या पता वापसी का
लेकिन तय है, देखा है
शिशु से वृद्ध होने तक का सफर।
सफर का अर्थ
बदल भी सकता है ..... शायद
तुम साथ होते तो भी सफर होता
तुम साथ नहीं
तो भी सफर का साथ तो है।
वजूद ए सफर को फर्क नहीं पड़ता
तुम्हारे साथ होने या न होने का
फर्क पड़ता है हमें और तुम्हें भी तो ....
क्यों की बड़ा फर्क है
सफर तन्हा हो
बद-गुमाँ हो
बद – हवास हो .....
या हो सफर खुश-नुमाँ ।

 

(दो)



सफर में काश..
अपनों की
अहमियत होती।
रिश्तों में मनमोहक महक होती
सफर कैसा भी होता
तो भी
ये जिंदगी
मायूसी में भी जन्नत होती।



गर्म स्वेटर



(एक)


मेरी ठिठुरन को
दूर करने के लिए
ऊन के मुलायम नर्म धागे से बुनती रही
मेरे लिए गर्म स्वेटर
अलग अलग रंग
चित्रकारी के
मैं तुम्हारी आँखों में बनने वाले
धागों से बुनता रहा तुम्हारे सपने
ताकि बदले में वैसे ही प्यार की
गर्माहट तुम्हें भी मिले
मिले रंगीन चित्रकारी भरे दिन रात

न कभी शीत ॠतु ने हमारे घर आना बंद किया
और न कभी मैंने रोका खुद को
तुम्हारी आँखों से पकड़ कर
लाल धागों से तुम्हारे सपनों को बुनना

25 शीत ॠतुओं की ठंड गवाह है
उस गर्माहट की
जो तुम्हारे बुने स्वेटरों से मुझे मिलती रही

अब चश्मे के पीछे आँखों में वो धागे नहीं दिखते
प्रमाण है एक
एक वो सारे तुम्हारे सपने पूरे ही नहीं हुए
बल्कि वे तुम्हारे चारो ओर
खड़े मुस्करा रहें हैं साकार होकर जीवंत ।


(दो)



ऐसा नहीं की पलकें भीगी न हों
ऐसा नहीं वो काजल की काली लकीर
आंसुओं से मिटी न हो
ऐसा नहीं की मैं सावन–भादों सी आँखों में
खो गए धागों को पकड़ने में असफल रहा हूँ ।

ऐसा नहीं की इन 25 वर्षो में
आंखे–काजल–सपनों के क्रम
आगे पीछे न हुए हो
लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ की
शीत ॠतु आई हो बिना तुम्हारे हाथों बने
नए गर्म स्वेटर को लिए हुए ।

यह आस्था थी ,
विश्वास था ,
सौगंध थी ,
साथ निभाने की
मैं हर बार की आँधी
और तूफान के जलजले के बाद
आँखों के धागे को पकड़ता रहा
देर सबेर ही सही लेकिन बुनता रहा
सपने सिर्फ तुम्हारे लिए।

.

अवधेश सिंह 


'स्वीट होम अपार्टमेन्ट',
एम.आई.जी/ऍफ़ ऍफ़-1,
प्लाट - 212 , सेक्टर-04,
वैशाली,गाजियाबाद–201010
[ रा.राज. क्षेत्र दिल्ली ]
मोबाइल–09868228699




अवधेश सिंह



  • जन्म: : जनवरी 4, 1959, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश (भारत)।
  • शिक्षा : विज्ञान स्नातक, मार्केटिंग मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, बिजनिस  एडमिनिस्ट्रेशन में परास्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है ।
  • प्रतिनियूक्ति  पर भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ मीडिया अधिकारी के पद पर भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय के डी.ए.वी.पी. [DAVP] , डी.ऍफ़.पी [DFP] के प्रमुख रहे व पी आई बी [PIB] , समाचार प्रभाग दूरदर्शन तथा आकाशवाणी विभागों से सम्बद्ध रहे [1989 -1995]  ।
  • साहित्यक यात्रा : 1972 में आकाशवाणी  में पहली  कविता  प्रसारित हुई मात्र तेरह वर्ष की बालावस्था में, स्कूल, विद्यालय से कालेज स्तर तक लेख , निबंध , स्लोगन , कविता लिखने का एक  क्रम   नयी कविता , गीत , नवगीत , गज़ल , शब्द चित्र , गंभीर लेख , स्वतन्त्र टिप्पड़ी कार , कला व साहित्यक समीक्षक की विधाओं के साथ आज तक निर्बाध जारी है ।
  • अस्सी -नब्बे के दशक में मौलिक रचनाएँ व लेख, सांस्कृतिक समीक्षायें आदि दैनिक जागरण , दैनिक आज, साप्ताहिक हिदुस्तान , धर्मयुग  आदि   में प्रकाशित हुए   तब के समय ब्याक्तिगत रूप से धर्मयुग के श्री गणेश मंत्री ,  साप्ताहिक हिंदुस्तान की श्रीमती म्रनाल पान्डे , दैनिक जागरण के स्व श्री नरेन्द्र मोहन व वरिष्ठ पत्रकार स्व श्री जीतेन्द्र मेहता , वरिष्ठ पत्रकार स्व श्री हरनारायण निगम का सानिध्य व सुझाव दिशा निर्देश प्राप्त का सौभाग्य  मिला था जो आज भी अविस्मरनीय है. प्रख्यात साहित्यकार, हिंदी प्रोफ़ेसर, पत्रकार डाक्टर स्व. श्री प्रतीक मिश्र  द्वारा  रचित " कानपुर के कवि " एक खोज पूरक दस्तावेज में प्रतिनिध ग़जल- कविता व जीवन परिचय का संग्रह 1990 में किया गया था । नव निकस , परिंदे , मंजूषा ,संवदिया आदि  गंभीर साहित्यक पत्रिकाओं और नेट पत्रिकाओं में लगातार रचनाएँ प्रकाशित हो रहीं हैं ।
  • संपादन व प्रकाशन कार्य यात्रा : सामाजिक संस्था अशोक क्लब की वार्षिकी सामाजिक गृह पत्रिका अनुभूति के संपादन व प्रकाशन कार्य 1979 से 1981 तक किया , मीडिया अधिकारी के रूप में लगातार 1990 से 1995 तक सम्बंधित नगरों की डायरी सूचना प्रसारण मंत्रालय हेतु प्रस्तुत की.  दूरसंचार विभाग की विभागीय प्रकाशन गृह पत्रिका गंतव्य कानपुर 1995 से 1998 तक, विभागीय प्रकाशन गृह पत्रिका हिमदर्शन शिमला 2000 से 2002 तक में सम्पादकीय सहयोग का कार्य  किया इसके अतिरिक्त दूरदर्शन शिमला ,आकाशवाणी तथा स्थानीय मंचों पर काव्य पाठ के साथ विभागीय राज-भाषा कार्यों में सतत संलग्नता नें हिदी साहित्य की उर्जा का लगातार उत्सर्जन किया है ।
  • प्रकाशित किताबें-
  • -प्रेम कविताओं पर आधारित संकलन "छूना बस मन"  [2013 ]
  • -सामाजिक विघटन ,मूल्यों -आस्थाओं पर कविताओं का संग्रह "ठहरी बस्ती ठिठके लोग " [2014]
  • प्रकाशाधीन पांडुलिपियाँ : आवारगी (गजल संग्रह ) , नन्हें पंक्षी (बाल कविताओं का संगह )
  • सम्पादन : अंतर्जाल साहित्यक-सांस्कृतिक पत्रिका www.shabdsanchar.in
  • अन्य संपर्क : https://www.facebook.com/awadheshdm , www.hellohindi.com
  • सम्प्रति : वर्तमान में ग्रेड-ई 5 सीनियर एक्जीक्युटिव अधिकारी पद पर भारत संचार निगम लिमिटेड के कार्पोरेट आफिस नयी दिल्ली में कार्यरत हैं।

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