गुरुवार, 5 मार्च 2015

रंग बरसे:दिन सुहाने आ गये (ग़ज़ल)-अंसार क़म्बरी



चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार



दिन सुहाने आ गये..



खिल उठीं सरसों की कलियाँ दिन सुहाने आ गये
आ गया फागुन कि हर बाली में दाने आ गये

फूल महुवे के झरे मौसम शराबी हो गया
आम के बाग़ों में खुशबू के ख़ज़ाने आ गये

आ गया फागुन मेरे कमरे के रौशनदान में
चन्द गौरय्यों  के जोड़े घर बसाने आ गये

नाचती-गाती हुई निकलीं सड़क पर टोलियाँ
चन्द चेहरे खिड़कियों में मुस्कुराने आ गये

एकता सदभावना के शे'र लेकर ‘क़म्बरी’
रंग की महफ़िल में लो होली मनाने आ गये


अंसार क़म्बरी

‘ज़फ़र मंजिल’, 11/116,
ग्वालटोली, कानपूर–208001
मो - 09450938629
ईमेल : ansarqumbari@gmail.com






3 टिप्‍पणियां:

  1. पहला दोहा ही इतना अपनापन लिए है कि उसने वहाँ से आगे जाने न दिया । अति सुंदर दोहे छंद

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    1. बहन कल्पना मिश्रा बाजपेई जी हार्दिक धन्यवाद - सदा सुखी रहें ...

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