मंगलवार, 8 मार्च 2016

मंजुल भटनागर की रचनाएं


चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार


फागुन



फागुन द्वार चार है
आम्र बौर मंजीरा लिए
पत्तों की खड़ ताल है
फागुन द्वार चार है

पीत रंग की ओढ़नी
हरित रंग का घाघरा
धरा का शृंगार है
फागुन द्वार चार है

कोयल कूक रही
शहनाई सा आभास है
राधा सी पगलाई नार
द्वारिका प्रवास है
फागुन द्वार चार है

लतिका विरह उच्छवास
गोपियों संग रास है
लग गई फांस है
गोपियों संग रास है
फागुन द्वार चार है


निमंत्रण



होली की सुगबुगाहट है
पेड़ों ने की खुसर पुसर है
पक्षियों संग विमर्श है
पत्ते खत सा निमंत्रण हैं.

टेसू ,बोगन विला रंग भरे
द्वार फैले,छाँव फैले
रंग फैले रहा अबीर सा
खुशबुओं के पाँव फैले
प्रकृति में आकर्षण है
पत्ते खत सा निमंत्रण है

अंतर्मन प्रतीक्षा है
बावरी उत्सुकता है
कोई उम्मीद जग रही
कोपले रस ले पगी
दे रही आमंत्रण है
पत्ते खत सा निमंत्रण है

हाट सजे बाग़ सजे
पलाश हरसिंगार सजे
सूर्य रथ चल पड़ा
हाक रहे श्री कृष्ण हैं
गोपियाँ मुग्ध हैं
उधो की न सुनें
प्रेम प्रीत हर्षन  है
पत्ते खत सा निमंत्रण है .


यादो के पनघट


रंग उड़े बादल से
सज रहे अबीर संग
आँगन द्वार रंग गए
यादों के पनघट
सज गए .

गाँव छोड़, शहर गए
खेत बेच दो मंजिला भये
खलियान बेरंगत हुए
देख मन रुसवा हुए
यादों के पनघट
सज गए .

कृष्ण संग गोपियाँ रंगी
रधिया अपटूडेट लगी
दुलेंडी के गीत गवे
कचौरी और गुजिया बनी
शगुन की घुटी भाँग

सुन मनवा भी मोद भए
यादों के पनघट
सज गए .

होलिका जली चौराहे पे
नाना भूंज लाये बूटवा
हल्दी लगी चूनर उड़े
फाग मंजिरें ढोलक बजे
आंखियन पोर रेशमी हुए
यादों के पनघट
सज गए . 

मंजुल भटनागर


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