मंगलवार, 14 जून 2016

अन्ना अख्मातोवा की दो कविताएँ


चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार



मैं उनके साथ हूँ


मैं उनके साथ नहीं हूँ जिन्‍होंने
शत्रुओं की यंत्रणाओं के हवाले कर दी है यह भूमि
मैं उनकी चापलूसी के झाँसे में नहीं आऊँगी
उनके हाथों में नहीं सौंपूँगी अपने गीत।
कैदी की तरह, रोगी की तरह
हर निर्वासित लगता है मुझे दयनीय,
ओ यायावर, अंधकार से भरी है तुम्‍हारी राह
कसैला तो लगेगा ही दूसरों की रोटी का स्‍वाद।
यहाँ आग के बेआवाज धुएँ में
शेष बचे यौवन का गला घोंटते हुए
एक भी प्रहार का मुँहतोड़ जवाब
दे नहीं पाए हम आज तक।
मालूम है हमें कि विलंबित मूल्‍यांकन में
न्‍यायसंगत ठहराया जाएगा हर पल...
पर दुनिया में कहीं भी नहीं हैं ऐसे लोग
जो हमसे अधिक हों अक्‍खड़, अश्रुविहीन और सरल।


अमन का गीत


आकाश की लहरों पर झूलते
पर्वत और समुद्र पार करते
उड़ते रहो अमन की फाख्‍ता की तरह
ओ मेरे मधुर गीत !
बताओ उसे जो सुन रहा है
कितना पास है वह चिर-प्रतीक्षित युग
क्‍या हाल हैं मनुष्‍य के तुम्‍हारे देश में।
तुम अकेले नहीं, बढ़ती जाएगी गिनती
तुम्‍हारे साथ उड़ती फाख्ताओं की -
दूर-दूर तक इंतजार कर रहे हैं
स्‍नेहिल मित्रों के हृदय
उड़ते रहो तुम सूर्यास्‍त की ओर
कारखानों के दमघोंटू धुएँ की ओर
हब्‍शी बस्तियों
और गंगा के नीले पानी की ओर।
(रूसी से अनुवाद: वरयाम सिंह)

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